काल सर्प दोष (योग) तब बनता है जब जन्म कुंडली के सातों ग्रह राहु–केतु अक्ष के एक ही ओर आ जाएँ, जिससे जीवन-ऊर्जा एक ही रेखा पर केंद्रित हो जाती है।
काल सर्प दोष — अर्थ, प्रकार और उपाय
जन्म तिथि से मुफ़्त काल सर्प दोष जाँच। 12 प्रकार (अनंत से शेषनाग), वास्तविक अर्थ और शास्त्रीय उपाय — भय-रहित व्याख्या के साथ।
काल सर्प दोष (योग) तब बनता है जब जन्म कुंडली के सातों ग्रह राहु–केतु अक्ष के एक ही ओर आ जाएँ, जिससे जीवन-ऊर्जा एक ही रेखा पर केंद्रित हो जाती है।
नीचे मुफ़्त कुंडली बनाएं और राहु–केतु की स्थिति देखें — यदि सभी ग्रह इनके बीच हों तो काल सर्प योग संकेतित है।
शास्त्र इसे तीव्रता और विलंब का सूचक मानते हैं, अशुभ भाग्य का नहीं — अनेक सफल व्यक्तियों की कुंडली में यह योग है।
12 नाम (अनंत, कुलिक, वासुकि, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक, शंखचूड़, घातक, विषधर, शेषनाग) राहु-केतु के भावों पर निर्भर हैं।
तुलना तालिका
| प्रकार | राहु भाव | शास्त्रीय भाव |
|---|---|---|
| अनंत | प्रथम | स्वयं व आरंभिक संघर्ष जो दृढ़ता देते हैं |
| तक्षक | सप्तम | साझेदारी का समय व धैर्य |
| विषधर | एकादश | लाभ देर से पर स्थिर |
| शेषनाग | द्वादश | आंतरिक विकास, यात्रा, त्याग |
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
काल सर्प दोष कैसे जाँचें?
कुंडली बनाकर राहु–केतु के भाव देखें। यदि शेष सभी ग्रह इनके बीच एक चाप में हों तो योग बनता है। जन्म समय की शुद्धता आवश्यक है।
क्या काल सर्प दोष वास्तव में अशुभ है?
नहीं — शास्त्र इसे तीव्रता व विलंब बताते हैं, दुर्भाग्य नहीं। इसे समय का पैटर्न मानें, जीवन का दंड नहीं।
काल सर्प दोष के उपाय?
राहु–केतु शांति पूजा (प्रायः त्र्यंबकेश्वर), महामृत्युंजय जप और नाग पंचमी/सोमवार अनुशासन। पूर्ण कुंडली बताती है कौन-सा उपाय लागू है।
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