विम्शोत्तरी दशा जन्म नक्षत्र के स्वामी से शुरू होकर 120 वर्ष की ग्रह अवधि प्रणाली है।
विम्शोत्तरी दशा कैलकुलेटर
जन्म तिथि से वर्तमान महादशा और अंतर्दशा जानें। 120 वर्ष की दशा तालिका।
मुख्य बातें
- जन्म तिथि, समय और शहर डालें — तुरंत वर्तमान महादशा, अंतर्दशा और 120 वर्ष की पूरी तालिका पाएँ।
- क्रम: केतु 7 → शुक्र 20 → सूर्य 6 → चंद्र 10 → मंगल 7 → राहु 18 → गुरु 16 → शनि 19 → बुध 17 वर्ष।
- जन्म नक्षत्र के स्वामी से दशा शुरू होती है; जितना नक्षत्र बीत चुका उतनी महादशा शेष बचती है।
- चल रही महादशा आपके ज्योतिष-विश्लेषण का ढाँचा है — गोचर, मुहूर्त, भविष्यवाणियाँ सब इसी के संदर्भ में पढ़ी जाती हैं।
- प्रीमियम रिपोर्ट में लिखित महादशा व्याख्या, अंतर्दशा कैलेंडर और गोचर-ओवरले मिलता है।
कैलकुलेटर के लिए क्या चाहिए
- जन्म तिथि — दिन, माह, वर्ष अनिवार्य
- जन्म समय — लगभग सही समय (±1 घंटा) भी प्रायः सही महादशा देता है
- जन्म स्थान — सटीक चंद्र स्थिति के लिए शहर और देश
- यदि जन्म समय पता न हो: चंद्रमा का नक्षत्र ~55 घंटे स्थिर रहता है; अधिकांश में तिथि से महादशा सही मिलती है
पूरी विम्शोत्तरी दशा संदर्भ तालिका
| महादशा स्वामी | वर्ष | इस काल के व्यापक विषय |
|---|---|---|
| केतु | 7 | वैराग्य, आध्यात्मिक गहराई, पैतृक कर्म, अकस्मात बदलाव |
| शुक्र | 20 | प्रेम, सृजन, आराम, धन, सौंदर्य, इंद्रिय-जगत |
| सूर्य | 6 | अधिकार, पिता, करियर, जीवनीशक्ति, पहचान |
| चंद्र | 10 | भावनाएँ, माता, जनसंपर्क, यात्रा, उतार-चढ़ाव |
| मंगल | 7 | साहस, संपत्ति, भाई-बहन, ऊर्जा, पहल और विवाद |
| राहु | 18 | महत्वाकांक्षा, विदेश, अपरंपरागत और भौतिक मार्ग |
| गुरु | 16 | ज्ञान, संतान, शिक्षक, धर्म, विस्तार और समृद्धि |
| शनि | 19 | अनुशासन, संरचना, सेवा, आयु, विलंबित किंतु टिकाऊ फल |
| बुध | 17 | बुद्धि, व्यापार, संचार, कौशल, विश्लेषण और लेखन |
अपना दशा परिणाम कैसे पढ़ें
परिणाम में महादशा स्वामी और अंतर्दशा स्वामी दोनों दिखते हैं। महादशा स्वामी वर्षों का व्यापक विषय तय करता है; अंतर्दशा स्वामी वर्तमान महीनों को रंग देता है। दोनों को पढ़ने के लिए: जन्म कुंडली में प्रत्येक ग्रह की भाव-स्थिति और भाव-स्वामित्व देखें, फिर उनके स्वाभाविक कारकत्व जोड़ें।
दशा और बड़ी जीवन-घटनाएँ
शुक्र, गुरु और चंद्र दशाएँ सबसे अधिक विवाह-संबद्ध हैं, विशेषकर जब 7वें भाव स्वामी भी अंतर्दशा में सक्रिय हों।
शनि, सूर्य और 10वें भाव स्वामी की दशाएँ करियर-निर्णायक पलों से जुड़ती हैं।
राहु, चंद्र और 12वें भाव स्वामी की दशाएँ विदेश गमन और अंतर्राष्ट्रीय अनुभवों से जुड़ती हैं।
केतु, गुरु और 9वें भाव स्वामी की दशाएँ साधना या दर्शन में बड़े बदलावों से जुड़ती हैं।
आपकी वर्तमान महादशा कितनी बची है?
कैलकुलेटर बताता है कि वर्तमान महादशा और अंतर्दशा में कितने वर्ष-माह-दिन शेष हैं। महादशा की अंतिम अंतर्दशा — अगले महादशा स्वामी की — प्रायः औपचारिक संक्रमण से हफ्तों या महीनों पहले ही अगली महादशा का स्वाद देती है।
अंतर्दशा और घटनाओं का समय
महादशा के भीतर अंतर्दशा (उपकाल) में विशिष्ट घटनाएँ — नौकरी का प्रस्ताव, जीवनसाथी से मुलाकात, स्वास्थ्य-प्रसंग — प्रायः साकार होती हैं। परस्पर मैत्री रखने वाले दो अंतर्दशा स्वामी, दोनों जन्म में बलवान और संबंधित भाव से सुसंबंधित, सर्वाधिक सकारात्मक संभावना बनाते हैं।
दशा और मुहूर्त
शास्त्रीय मुहूर्त और दशा साथ मिलकर काम करते हैं। बड़े निर्णय उस ग्रह की अंतर्दशा में लेना जो संबंधित भाव का स्वामी हो — और जब वह ग्रह गोचर में भी अनुकूल हो — यही 'दोहरी पुष्टि' है जिसे ज्योतिषी खोजते हैं।
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- व्याख्या
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महादशा कितने वर्ष की?
केतु 7, शुक्र 20, सूर्य 6, चंद्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19, बुध 17।
दशा का महत्व?
चल रही महादशा सक्रिय विषयों को रंग देती है।
क्या दशा मेरी भविष्यवाणी बदल सकती है?
हाँ — महादशा स्वामी की जन्म-कुंडली में स्थिति किसी भी भविष्यवाणी का सबसे शक्तिशाली संशोधक है। एक ही गोचर वाले दो व्यक्ति भिन्न दशाओं में बहुत भिन्न परिणाम अनुभव करते हैं।
क्या राहु या केतु महादशा कठिन होती है?
जरूरी नहीं। राहु महादशा प्रायः सबसे अधिक सांसारिक-घटनापूर्ण काल होता है जब राहु जन्म में शुभ है; केतु महादशा आध्यात्मिक गहराई लाती है। गुणवत्ता कुंडली पर निर्भर है।
क्या बिना जन्म समय के दशा सटीक मिलती है?
महादशा के लिए प्रायः हाँ। अंतर्दशा और प्रत्यंतर्दशा की सटीक तिथियों के लिए जन्म समय (15–20 मिनट की सटीकता) आवश्यक है।
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